- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा, कहा - “काम में रुकावट नहीं चलेगी”; अधिकारियों को 24×7 सक्रिय रहने के दिए निर्देश
- महाकाल मंदिर में अलसुबह गूंजी घंटियां, वीरभद्र के कान में स्वस्तिवाचन के बाद खुले पट; भस्म अर्पण के बाद शेषनाग रजत मुकुट में सजे बाबा
लापरवाही… एमपी हाउसिंग बोर्ड में नामांतरण समिति की बैठक टली
जिम्मेदारों ने नहीं दिखाई रूचि
छह माह के बाद होने वाली थी मीटिंग
छह माह से अपने आशियानों के नामांतरण के लिए इंतजार कर रहे एमपी हाउसिंग बोर्ड के सदस्यों को बुधवार को एक बार फिर निराशा हुई। इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर करीब छह माह बाद होने वाली बैठक में न तो विधायक पहुंचे और न कलेक्टोरेट से कोई अफसर। नतीजतन बैठक एक बार फिर अनिश्चित समय तक के लिए निरस्त हो गई।
हाउसिंग बोर्ड की शास्त्रीनगर, देसाईनगर व नागदा की गवर्नमेंट कॉलोनी कॉलोनी सहित१२ रहवासी करीब छह माह से मकान अपने नाम करने के लिए आवेदन देकर चक्कर लगा रहे हैं। नामांतरण बोर्ड के सदस्यों के अनुमोदन पर ही हो सकता है। यही वजह है बोर्ड के भरतपुरी स्थित कार्यालय में बुधवार तीन बजे बैठक रखी गई थी। इसमें बोर्ड उपायुक्त प्रबोध पराते, कार्यपालन यंत्री आरसी पंवार, संपत्ति अधिकारी अशोक शर्मा के साथ ही कलेक्टर प्रतिनिधि, दक्षिण विधायक डॉ. मोहन यादव और नागदा विधायक दिलीप गुर्जर या उनके प्रतिनिधि सहित छह लोगों को उपस्थित होना जरूरी था लेकिन एक बोर्ड अधिकारी को छोड़कर कोई उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते नामातंरण बैठक आगामी आदेश तक के लिए टल गई।
कलेक्टर भोपाल में, उपायुक्त फंसे
बोर्ड अफसरों के अनुसार छह सदस्यीय कमेटी में से चार सदस्य उपस्थित होकर अनुमोदन कर देते तो नामांतरण किया जा सकता है लेकिन बोर्ड उपायुक्त कालापीपल गए थे और सड़क खराब होने के कारण समय पर नहीं लौट सके। कार्यपालन यंत्री शर्मा बीमार हैं। कलेक्टर भोपाल मीटिंग में होने से अधीनस्थ नहीं पहुंचे। अक्षरविश्व संवाददाता ने दोनों विधायकों से चर्चा का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं होने से उनके नहीं आने का कारण पता नहीं चल सका।
तीन माह में होना चाहिए बैठक
बोर्ड सूत्रों के अनुसार नामांतरण समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में होने का नियम है। नामांतरण आवेदन नहीं आने पर बैठक निरस्त की जा सकती है लेकिन बोर्ड अधिकारी करीब १०-१२ प्रकरण आने पर ही बैठक बुलाते हैं। अन्य प्रतिनिधी भी इसके प्रति गंभीर नहीं होते इसलिए समय पर मीटिंग नहीं हो पाती।